परमेश्वर उन भावपूर्ण लोगों की तलाश में है जो उसके ह्रदय जैसा मन रखते हो।

नहेमायाह उस व्यक्ति के लिए प्रतिनिधि हो सकता है, जो उत्सुकता से सर्वशक्तिमान परमेश्वर से अपनी विरासत को पुन: निर्माण करने की गुहार करता है।

( नहेमायाह २:२-८) इस पर राजा ने मुझसे पूछा, “क्या तू बीमार है? तू उदास क्यों दिखाई दे रहा है? मेरा विचार है तेरा मन दु:ख से भरा है।” इससे मैं बहुत अधिक डर गया।
किन्तु यद्यपि मैं डर गया था किन्तु फिर भी मैंने राजा से कहा, “राजा जीवित रहें! मैं इसलिए उदास हूँ कि वह नगर जिसमें मेरे पूर्वज दफनाये गये थे उजाड़पड़ा है तथा उस नगर के प्रवेश् द्वार आग से भस्म हो गये हैं।”

फिर राजा ने मुझसे कहा, “इसके लिये तू मुझसे क्या करवाना चाहता है?” इससे पहले कि मैं उत्तर देता, मैंने स्वर्ग के परमेश्वर से विनती की।
फिर मैंने राजा को उत्तर देते हुए कहा, “यदि यह राजा को भाये और यदि मैं राजा के प्रति सच्चा रहा हूँ तो यहूदा के नगर यरूशलेम में मुझे भेज दिया जाये जहाँ मेरे पूर्वज दफनाये हुए हैं। मैं वहाँ जाकर उस नगर को फिर से बसाना चाहता हूँ।”
रानी राजा के बराबर बैठी हुई थी, सो राजा और रानी ने मुझसे पूछा, “तेरी इस यात्रा में कितने दिन लगेंगे? यहाँ तू कब तक लौट आयेगा?” राजा मुझे भेजने के लिए राजी हो गया। सो मैंने उसे एक निश्चित समय दे दिया।
मैंने राजा से यह भी कहा, “यदि राजा को मेरे लिए कुछ करने में प्रसन्नता हो तो मुझे यह माँगने की अनुमति दी जाये। कृपा करके परात नदी के पश्चिमी क्षेत्र के राज्यपालों को दिखाने के लिये कुछ पत्र दिये जायें। ये पत्र मुझे इसलिए चाहिए ताकि वे राज्यपाल यहूदा जाते हुए मुझे अपने—अपने इलाकों से सुरक्षापूर्वक निकलने दें।
मुझे द्वारों, दीवारों, मन्दिरों के चारों ओर के प्राचीरों और अपने घर के लिये लकड़ी की भी आवश्यकता है। इसलिए मुझे आपसे आसाप के नाम भी एक पत्र चाहिए, आसाप आपके जंगलात का हाकिम है।” सो राजा ने मुझे पत्र और वह हर वस्तु दे दी जो मैंने मांगी थी। क्योंकि परमेश्वर मेरे प्रति दयालु था इसलिए राजा ने यह सब कर दिया था।

नहेमायाह ने परमेश्वर की खेज़ की और अपना सबकुछ ख़तरे में डाल दिया ताकि यरुशलेम को बहाल किया जा सके।हम इस कहानी के द्वारा पाँच सबक़ सीख सकते है, नहेमायाह के जीवन से सफलता के लिए पाँच महत्वपूर्ण कुंजियाँ ।

कुंजी १. उपवास, शोक, प्रार्थना और उसके चेहरे की खोज।

( नहेमायाह १:४) मैंने जब यरूशलेम के लोगों और नगर परकोटे के बारे मैं वे बातें सुनीं तो में बहुत व्याकुल हो उठा। मैं बैठ गया और चिल्ला उठा। मैं बहुत व्याकुल था। बहुत दिन तक मैं स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए उपवास करता रहा।

समय निकालकर परमेश्वर की उपस्थिति में बैठकर रोएं, उसे पुकारे। सप्ताह में कमसे कम एक बार उपवास रखें। यह हमारे मसीह जीवन में उमड़ता हुआ सैलाब बने। हम अपनी परिस्थिति में परमेश्वर का ध्यान आकर्षित कर सकते है।

यदि आप में बसा हुआ पवित्र आत्मा कराहा रहा है, तो उसे अपने ह्रदय से पुकारने दो। नहेमायाह की तरह हमारा कराहना स्वर्ग तक पहुँचे। अपने आँसू अपने लिए बात करना शुरू कर दें।

यदि मैं ईश्वर की उपस्थिति के सामने रोता हूँ, तो मैं मनुष्य की सामने नहीं रोऊँगा।

कुंजी २. उसकी आराधना करो। हम सबको उसकी ज़रूरत है,क्या हम उसे पहला दर्जा देंगे?

हमारा परमेश्वर उसका वचन रखनेवाला परमेश्वर है।हम उस पर विश्वास रख सकते है।

(नहेमायाह १:५) इसके बाद मैंने यह प्रार्थना की: “हे यहोवा, हे स्वर्ग के परमेश्वर, तू महान है तथा तू शक्तिशाली परमेश्वर है। तू ऐसा परमेश्वर है जो उन लोगों के साथ अपने प्रेम की वाचा का पालन करता है जो तुझसे प्रेम करते हैं और तेरे आदेशों पर चलते हैं।

जेसै हम उसे और उसकी अच्छाई को याद करते है, उससे हमारा विश्वास जागरूत होता है और हमारी प्रार्थना परमेश्वर के ह्रदय के लिए भावुक होकर यह जानती है कि वह अपने वचन रखने में  निरंतर विशवासयोगय और प्रभावशाली है।

कुंजी ३. पश्चाताप करें।

(नहेमायाह १:६) “अपनी आँखें और अपने कान खोल। कृपा करके तेरे सामने तेरा सेवक रात दिन जो प्रार्थना कर रहा है, उस पर कान दे। मैं तेरे सेवक, इस्राएल के लोगों के लिये विनती कर रहा हूँ। मैं उन पापों को स्वीकार करता हूँ जिन्हें हम इस्राएल के लोगों ने तेरे विरूद्ध किये हैं। मैंने तेरे विरूद्ध जो पाप किये हैं, उन्हें मैं स्वीकार कर रहा हूँ तथा मेरे पिता के परिवार के दूसरे लोगों ने तेरे विरूद्ध जो पाप किये हैं, मैं उन्हें भी स्वीकार करता हूँ।परिपूर्ण

हमारा परमेश्वर परिपूर्ण है। यदि कहीपर ग़लती है, तो वो हममें है। इसलिए हम अपने पापों को कबुल करें।हमारे जीवन में ऐसी कोई भी वस्तु न हो जो हमे परमेश्वर के क़रीब आने से रोके। हम अपने पापों को परमेश्वर की ओर लेकर आए क्योंकि केवल एक मात्र तरीक़ा है जिसे शैतान हमारे ख़िलाफ़ इस्तेमाल करता है और वह न कबुला हुआ पाप।

कुंजी ४. हमारे परमेश्वर का स्मरण करें और एक यादगार भेंट के रूप में अपने वचन का उपयोग करें।

(नहेमायाह १:८-९)”तूने अपने सेवक मूसा को जो शिक्ष दी थी, कृपा करके उसे याद कर। तूने उससे कहा था, ‘यदि इस्राएल के लोगों ने अपना विश्वास नहीं बनाये रखा तो मैं तुम्हें तितर—बितर करके दूसरे देशों में फैला दूँगा।किन्तु यदि इस्राएल के लोग मेरी ओर लौटे और मेरे आदेशों पर चले तो मैं ऐसा करूँगा: मैं तुम्हारे उन लोगों को, जिन्हें अपने घरों को छोड़कर धरती के दूसरे छोरों तक भागने को विवश कर दिया गया था, वहाँ से मैं उन्हें इकट्ठा करके उस स्थान पर वापस ले आऊँगा जिस स्थान को अपनी प्रजा के लिये मैंने चुना है।

नहेमायाह ने वचन के द्वारा परमेश्वर से प्रार्थना की कि परमेश्वर यहोवा ने जो कहा है वह वो करेगा। जब हम परमेश्वर से उसके वचन के द्वारा प्रार्थना करते है तब परमेश्वर की ओर से एक अदभुत सामर्थ्य हमारी तरफ़ प्रकट होता है।

कुंजी ५. याद करो की परमेश्वर ने क्या-क्या किया।

परमेशवर का वचन उसकी सच्चाई और शक्ति के गवाही से भरा हुआ है। अपने विश्वास को जगाओ और अपनी ह्रदय की उम्मीदों को परमेश्वर की अच्छाई में इस तरह उँडेल दो कि आप तब तक हार न मानो जब तक आप परमेश्वर की भलाई को अपने जीवन में स्पष्ट रूप से प्रकट होता न देख लो।