लंबे समय से कलेसियाओ मे अधययन शब्द को लेकर डर है। कई लोगों के लिए, यह केवल पहाड़ के किनारे चिंतित करते लंबे दाढ़ी वाले गुरुओं की छवियों को याद दिलाता है या कोई योग करते हुए शांति के मंतरों को जपने वाला।

कितनी दुख भरी बात है की हमारे परमेशवर को याद करने के इस कार्य को हम आसानी से भुल रहे है।

अधययन करना योग मे नही पाया जाता है। असलियत मे तो योग हिंदुत्व से जुड़ा हुआ है। हर एक योग आसन हिंदुत्व के देवी देवताओं को समर्पित करता है ओर यह मददगार नही परंतु हानी ला सकता है।हालांकि, ईसाई ध्यान करने का तरीक़ा सांसारिक ध्यान से मूल रूप से अलग है। बाइबल हमे साफ़ तरीक़े से बताता है की किस प्रकार हमे इस शक्तिशाली कार्य को इस्तेमाल करना चाहिए।

बाइबल बताता है कि अध्ययन मतलब परमेशवर पर उम्मीद लगाए रहना, एक ऐसे मन से जो समझने के लिए तयार है।

वह इसहाक था जिसने हमे यह करके बताया जब वह अपनी दुल्हन के लिए परमेशवर पर इंतज़ार किया। आईए देखते है, उत्पत्ति २४:६३ “एक शाम इसहाक मैदान में विचरण करने गया। इसहाक ने नज़र उठाई और बहुत दूर से ऊँटों को आते देखा।” यहां एक सफल व्यवसायी, इसहाक था, जो परमेशवर की बातों पर ध्यान की शक्ति को समझता था। जैसे इसहाक ने परमेशवर पर चिंतन किया , परमेशवर रिबका को उसके पास ले आया और आने वाली पीडी का फल की आशीशे उन पर थी।

मगन करना मतलब परमेशवर पर ध्यान करना, शांत रहकर महान इनाम की उम्मीद रखना।

यशायाह ४०:३१ कहता है, “किन्तु वे लोग जो यहोवा के भरोसे हैं फिर से शक्तिशाली बन जाते हैं।जैसे किसी गरुड़ के फिर से पंख उग आते हैं।ये लोग बिना विश्राम चाहे निरंतर दौड़ते रहते हैं।ये लोग बिना थके चलते रहते हैं।” चिंतन के समय हम रूक कर परमेशवर के वचन का ध्यान करते है।

चिंतन करना एक तैयारी है जो हमारे राजा के सामने हमें पहुंचाता है।

यदि आप एक राजा से मिलने की उम्मीद रखते हो, तो उसे मिलने से पहले बहुत से नियमों से गुज़रना पड़ता है। एस्तेर को राजा से मिलने से पहले छे महिनो तक सुगंधित जल मे स्नान करना पड़ा! हमारे इस समय मे कोई भी व्यक्ति बकिंघम राजमहल मे बिना महारानी ऐलीजाबेत के अनुमति के प्रवेश नही कर सकता,उनके ख़ुद के नागरीक भी नही।

राष्ट्रों में शाही अदालतों में, राजा के साथ एक दर्शक के लिए इंतजार करना पड़ता है।कोई भी नागरिक समय तय नही करता। हमारे राजा का समय उसका समय है। जैसे हम परमेशवर पर धीरज रखते है वो उसे बच्चों को और भी सामर्थ्य प्रदान करता है। और ईस पवित्र इंतज़ार मे बहुत बड़ा प्रतिफल रखा हुआ है।

चिंतन करना हमे विजेता की तैयारी सिखाता है।

यहोशू जैसे दस लाख ईसराइली लोगों को परमेशवर के वादे अनुसार परमेशवर के बताए हुए स्थान पर ले जा रहा था , तो परमेशवर ने उसे उनके वचन को मगन करने के लिए कहा था।

यहोशू, तुम्हें दृढ़ और साहसी होना चाहिये! तुम्हें इन लोगों का अगुवा होना चाहिये जिससे वे अपना देश ले सकें। यह वही देश है जिसे मैंने उन्हें देने के लिये उनके पूर्वजों को वचन दिया था।किन्तु तुम्हें एक दूसरी बात के विषय में भी दृढ़ और साहसी रहना होगा। तुम्हें उन आदेशों का पालन निश्चय के साथ करना चाहिए, जिन्हें मेरे सेवक मूसा ने तुम्हें दिया। यदि तुम उसकी शिक्षाओं का ठीक—ठीक पालन करोगे, तो तुम जो कुछ करोगे उसमें सफल होगे।उस व्यवस्था की किताब में लिखी गई बातों को सदा यादा रखो। तुम उस किताब का अध्ययन दिन रात करो, तभी तुम उसमें लिखे गए आदेशों के पालन के विषय में विश्वस्त रह सकते हो। यदि तुम यह करोगे, तो तुम बुद्धिमान बनोगे और जो कुछ करोगे उसमें सफल होगे। (यहोशू १:६-८)

चिंतन जल्द ही कार्य लेकर आता है। जींसपर आप अध्ययन करते हो वही आप करते हो। जब आप परमेशवर के वचन पर अध्ययन करते हो तब आपको उन्नती प्राप्त होती है। ईसराइल के लोगों को लेकर जाते समय, परमेशवर ने यहोशू को एक ही सलाह दि परमेशवर के वचन को दिन रात मगन करते रहने की। कनान देश मे प्रवेश करते ही यहोशू ने ३१ राजाओं पर विजय हासिल की केवल मन्ना खाए हुए लोग और युद्ध के पहले ख़तना किए हुए के साथ मिलकर।

अध्ययन करना हमारे दिमाग़ को परमेशवर की दृष्टि से देखना सिखाता है।

सोचिए कि इस वक़्त अापक किस बात पर अध्ययन कर रहे हो। क्या वो आपका डर, आपकी कोई चिंता या कोई समस्या है ? हमारे सोच विचार ज़हर की तरह हो सकते है जो की ईस परेशान भरी ज़िंदगी से उत्पन्न हो सकते है। आँकड़े बताते है की तक़रीबन ८०% हमारी सोच बुरी ही होती है।

इसके बजाए की हम हमारी परेशानीओ पर अध्ययन करे, हमे परमेशवर के वचन पर अध्ययन करना चाहिए।

इसराइल का बादशाह, राजा दाउद, राजा साऊल के वांछित सूची मे १३ वर्ष तक वांछित रहा।

वह अपनी ईस समय की आपबीती हमसे बाटता है :

(भजन संहिता १:१-२) सचमुच  वह जन धन्य होगायदि वह दुष्टों की सलाह को न मानें,और यदि वह किसी पापी के जैसा जीवन न जीएऔर यदि वह उन लोगों की संगति न करे जो परमेश्वर की राह पर नहीं चलते। वह नेक मनुष्य है जो यहोवा के उपदेशों से प्रीति रखता है।वह तो रात दिन उन उपदेशों का मनन करता है।

अध्ययन करना परमेशवर पर ध्यान केंद्रित करने की अच्छी रणनीति है।

आपके आस पास जो होता है वह आपको मायने नही रखेगा जब परमेशवर आपको अलग दृष्टि से बताएगा।

जैसे हम परमेशवर के वचन को अध्ययन करते है परमेशवर का विवेक हमारी सांसारिक सोच को हटाकर हमे जयवंत बनाता है।

(भजन संहिता ११९: २३) यहाँ तक कि प्रमुखों ने भी मेरे लिये बुरी बातें की हैं।किन्तु मैं तो तेरा दास हूँ।मैं तेरे विधान का पाठ किया करता हूँ।

अगली बार दुश्मन चिंता के साथ अपने दिमाग पर दस्तक दे, तो पिछले हफ्ते परमेश्वर ने आपके लिए क्या किया, इस पर ध्यान देने के लिए समय निकालें। परमेशवर ने आपके लिए जो कुछ भी किया है उसकी एक सूची रखें। उस सुची मे नई नई बातें जोड़ते रहीए। फिर, जब आप निराश महसूस करे, तो उस सूची में जाएं और उसकी भलाई को ध्यान करे।

यदि आप प्रार्थना और मध्यस्थर से अधिक अधययन करते हो, तो समझ,दृष्टि और शांति आपकी वास्तविकता होगी। चिंतन दुष्ट आत्माओं के लिए एक निर्वात बनाता है, जैसे नकारात्मक विचार शैतान के लिए आपके घर तक पहुंचने के लिए खिड़कियां बनाता है।

एक योद्धा की सबसे बड़ी संपत्ति उसके हथियार नहीं, बल्कि उसका दिमाग होता है। जीसपर आप अध्ययन करते हो वो मायने रखता है। अध्ययन करने को अपना नया अभ्यास बनाए और देखे कैसे परमेशवर अापकी हर लड़ाई को आशीशीत करते है!