भजन संहिता ७८:15-१६ ‘वह जंगल में चट्टानें फाड़कर, उनको मानो गहरे जलाशयों से मनमाना पिलाता था।’
‘उसने चट्टान से भी धाराएँ निकालीं और नदियों का सा जल बहाया।’

क्या आप कभी गरमी के दिनों मे समुद्र तट पर गए हो? यदि आप काफ़ी देर तक समंदर की रेत पर चले तो अपने आप को ठंडा करने के लिए आप समंदर मे जाना ज़रूर पसंद करोगे। जिस समय तापमान बहुत ज़्यादा हो उस समय किनारे के पास का पानी बहुत ज़्यादा गरम होता है। किनारे से गहरा पानी ठंडा होता है। असलियत मे राहत तो तब मिलती है जब आप इस झुलसानेवाली गरमी मे पुरी तरीक़े से पानी मे छलाँग लगाकर, तैरते हुए गहराई मे जाकर एक अच्छे ठंडे स्थान पर पानी मे होते हो। तब कही जाकर आपको ताजगी मिलती है। लंबे समय के बाद एक गहरी डुबकी तालाब के या समंदर के ठंडे पानी मे आपको ठंडा रखती है। कितनी अच्छी राहत की बात है!

परमेश्वर अपने अनुग्रह के विभिन्न स्तर हमे दिखाते है, जैसे की उनके वचन मे बताया है,बहती धाराएँ, नदियों और गहराई। गहराई मे पानी बहुतायत से होता है, वही समंदर मे पानी का झरना होता है। नदियाँ केंद्रित, दिशा और निदेश के साथ आशीश से भरी हुई भरपूर जगह हैं। नदियाँ आगे जाकर अलग अलग स्थानों मे बहते हुए नाले बन जाते है।

कई जगहों पर केवल बहते हुए नाले दिखाई देते है। कुछ अन्य स्थानों में आप एक शक्तिशाली नदी की गर्जना से आश्चर्यचकित हो सकते हैं,जो प्रवाह की ओर से, छोटी धाराओं में विभाजित होकर ,छोटे नाले या छोटा सा तालाब बन जाता है।

मसीह जीवन परमेश्वर के दिए हुए उद्धार से शुरू होता है। हमारा विश्वास एक लंबा जीवन का सफ़र है, जो परमेश्वर के बड़ते अनुग्रह के पीछे प्यासा होकर चलना है।

हमे गुनगुने स्थान से भाग निकलना होगा ऐसे जगह से जहाँ परमेश्वर के लिए हमारी प्यास साधारण हो गई हो। परमेश्वर की संतान होने के नाते हमे उसकी ओर गहराई मे जाने की चाह होनी चाहिए।

परमेश्वर उन लोगों का इंतज़ार कर रहा है जो उसके लिए प्यासे हो,जो उसके प्यार की बुंदो से झील तक, झूील से नदियों ओर परमेशवर की गहराई मे जाना चाहते है।

गहराई मे जाने से पहले आपको उसकी नदी को खोजना होगा। और नदी को खोजने के पहले आपको झील की खोज करनी होगी। इतना ही नही झील से पहले आप मे वो प्यास हो जो चंद बूँदों से नही मीटा जा सकती।

परमेशवर की तलाश की शुरुआत आप मे उसकी इच्छा से होती है।पोलुस कहता है, “तुम बड़े से बड़े वरदानों की इच्छा में रहो १ कुरिनथियों १२:३१। इच्छा आपके ह्रदय मे है परंतु सच्ची इच्छा इंतज़ार ओर क़ायम रहने से उत्पन्न होती है, ऐसी इच्छा जो कभी हार नही मानेगी।

परमेशवर के पीछे चलने के तीन पड़ाव विश्वासी के लिए ज़रूरी है, परमेशवर से माँगना, खोजना और खटखटाना। पहला पड़ाव परमेशवर से माँगना, दूसरा पड़ाव परमेशवर से खोजना है परंतु केवल खोजते मत रहो अब आपको दरवाज़ा खटखटाने की ज़रूरत है।

माँगना केवल आपके इच्छा को दर्शाता है,प्रभु मुझे तुझसे जानना है। धन्यवाद इन बूँदों के लिए लेकिन अब मुझे गहराई मे आना है आपके झील मे…

खोजने के लिए आपको यह जानना होगा की परमेशवर मे अधिक को कैसे खोले,
जानिए की आपको ऐसा क्या करना होगा जिससे आप परमेशवर के ह्रदय को छु पाए?
बूँदों से धारा तक अपनी यात्रा पर प्रतिबिंबित करे।
आगे बढ़ते रहने के लिए कारण खोजते रहिए।
परमेशवर से पूछिए : कौनसी चीज़ें मुझे करनी चाहिए और कौनसी बंद कर देनी चाहिए ?

हर एक विश्वासी जिसने इतिहास रचा है वह आगे बढ़ता चला है, माँगने से खोजने तक और खोजने से स्वर्ग का द्वार खटखटाने तक।

खटखटाना और खोजना दोनों अलग पड़ाव है। खटखटाने की आवाज़ आपके ह्रदय से आती है,एक ऐसी प्यास जो बेदारी को जन्म देती है। केवल आशिशे पाने के लिए नही परंतु अब हम उसे जो हमारा जीवित परमेशवर, हमारा स्वर्गीय पीता है, प्रभु यीशु जो हमारा उद्धारकर्ता है जानने की आरज़ू रखते है पुरी तरीक़े से पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर आगे बड़ते है।

प्रियो, स्वर्ग के दरवाजे पर तब तक दस्तक दो जब तक आप परमेशवर के ह्रदय को छू नही लेते!

बूँद भरी मसीह जीवन से परमेशवर की धाराओं से नदी तक जाने के लिए और नदियों से गहराई तक जाने के लिए, हर एक विश्वासी को माँगने से खोजने तक और खोजने से खटखटाने तक बढते जाना है। हमारी इस दुनिया की भलाई के लिए हमे तब तक नही रूकना है जब तक हम सब एक साथ गहराई मे न उतरे।

परमेशवर की गहराई से जितना हम समझते है उससे बहुत अधिक है। वह हमारे नियंत्रण से ज़्यादा है। वह केवल परमेशवर से होकर परमेशवर के लिए होती है। स्वर्ग राज्य भूखों, ईमानदारों और अतिसाहसिक लोगों के लिए खुला है।

बूंद से धारा तक नदी से समंदरी गहराई तक की यात्रा है, जो आपकी सच्ची इच्छा से शुरू होती है, परमेशवर की महिमा के लिए! प्रियो, दुनिया को उत्सुक ईसाइयों की एक सेना की जरूरत है जो परमेशवर का पीछा करने की खोज मे कभी हार नही मानते। क्या आप इन भूखों की सुधी मे अपना नाम दर्ज करोगे?

आशा करते है की जैसे हम आगे बढ़ते है, हम ईमानदारी से परमेशवर का पीछा करते रहै, गहराई से गहराई तक!